संदेश परक फिल्म है ‘‘ये कैसा पल दो पल का प्यार’’

गंगोत्री पिक्चर्स प्रा. लि. कृत हिन्दी फीचर फिल्म ‘‘ये कैसा पल दो पल का प्यार’’ का विशेष प्री व्यू शो पिछले दिनों फन रिपब्लिक के ज़ी प्री-व्यू थियेटर मंे रखा गया। यह फिल्म ग्रामीण अंचलों में अब तक व्याप्त ऊंच-नीच, छोटे-बड़े की रूढि़वादी सोच को जड़-मूल से उखाड़कर एक समतामूलक समाज बनाने को प्रेरित करती है। निर्माता नरेन्द्र कापसिमे, सरिता सिंह व पदम सरावगी की इस फिल्म के निर्देशक संजीव वेदवान और एक्जिक्यूटिव प्रोड्यूसर सुभाष आर. दुरगकर हैं। समानता के संदेश को फिल्म में एक प्रेम कहानी के माध्यम से कहने की कोशिश की गयी है। एक ब्राह्मण कन्या जब एक दलित युवक को दिल दे बैठती है, तो अचानक मानों भूचाल आ जाता है। इस बेमेल मेल-मिलाप का क्या होगा यही अंदेशा फिल्म को एक आश्चर्यजनक बिन्दु तक ले जाता है।
‘‘ये कैसा पल दो पल का प्यार’’ में हरियाणवी फिल्मों के सुपर सितारे उत्तर कुमार और लवली जोशी कहानी की धुरी हैं। उत्तर के संवाद भी हरियाणवी तर्ज पर हैं, मगर उनका अभिनय बेहतर है। लवली भी ठीक हैं और लवली-लवली लगती है। सहयोगी कलाकारों में सचित कुमार, आनंददीप पेशवानी, नरेन्द्र कापसिमे ने अच्छा काम किया है। पदम सरावगी, प्रशांत कुमार, रामवीर तोमर, सीमा डोगरा, बबलू त्यागी, सुनीता, मधु वर्मा, कंचन राजेन्द्र कश्यप, अरविंद मलिक भी अपनी संक्षिप्त भूमिकाओं में ठीक हैं। अमन श्लोक का संगीत सामान्य स्तर का है, मगर कर्णप्रिय है। रितुराज का नृत्य निर्देशन भी अच्छा है। कुल मिलाकर यह एक सार्थक सोचवाली साफ सुथरी फिल्म है। शीघ्र ही यह फिल्म बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और मुंबई एवं अन्यत्र एक साथ प्रदर्शित होगी।