राजेश निकुंभ और कंगना का इंतकाम

मूलतः इंजीनियर राजेश निकुंभ को आप लोग अब तक एक्स जुनियर मिस्टर बाॅम्बे के नाम से भी जानते हैं। कुछ लोग जाॅन अब्राहम के साथ इनको माॅडलिंग में भी देख चुके हैं। इसके अतिरिक्त अनुपमा वर्मा के संग ‘‘ग्रहण’’ में भी नज़र आ चुके हैं राजेश निकुंभ। राजेश को हेमा मालिनी सरीखी अभिनेत्री के साथ भी एक बार नहीं, कई-कई बार काम करने का सुअवसर मिल चुका है। यह मौका स्वप्न सुंदरी के मंचीय कार्यक्रमों में मिलता रहा है। राजनीति में सक्रिय होने के पश्चात् यद्यपि हेमा मालिनी को इस तरह की प्रस्तुतियों के लिए समय का अभाव रहता है। फिर भी, जब हेाता है, तब राजेश का होना पक्का होता है। हेमा जब द्रौपती बनती हैं, तब राजेश द्यृष्टदुम्न और जयद्रथ की दोहरी भूमिका निभाते हैं। जब वह महालक्ष्मी बनती हैं, तब राजेश ब्रह्मा बनते हैं।
‘रामायण’ नृत्य नाटिका में केवट हेाते हैं राजेश। आज वहीं राजेश निकुंभ एक भोजपूरी फिल्म ‘कंगना का इंतकाम’ को लेकर चर्चा में हैं।
प्रस्तुत हैं, राजेश से हुई बातचीत के अंश-

‘कंगना का इंतकाम’ में आपकी भूमिका क्या है?
कंगना हालात की शिकार एक लड़की है, जिसका बलात्कार होता है। मायूस होकर वह अंततः डूबने का निर्णय लेती है। लेकिन मैं उसे डूबने से बचा लेता हूँ और उसमें प्रतिशोध लेने की इच्छाशक्ति भर देता हूँ।
 उसे बचाने के लिए आप पहले से तैयार रहते हैं?
दरअसल मैं उस वक्त मानसिक रूप से विक्षिप्त रहता हूँ। पूर्व में एक लड़की से मुझे प्रेम रहता है। उसका भी बलात्कार किया जाता है और वह डूबकर जान दे देती है। मैं बचा नहीं पाता। इस गम में मेरी मानसिक दशा बिगड़ जाती है। जब कंगना के साथ उसी तरह का हादसा होता है और दसे बचा लेता हूँ तब जाकर मैं अपने में लौटता हूँ।
 ये तो खिलौना के संजीव कुमारवाली भूमिका है?
नहीं, कुछ दृश्य आपको उनकी याद दिला दे, पर आगे चलकर मेरा चरित्र बदल जाता है। मैं दोहरे प्रतिशोध की आग में हिंसक हो जाता हूँ। कंगना को इंतकाम लेने के लिए मैं ही प्रेरित करता हूँ, मैं ही उसका मित्र, मार्गदर्शक हूँ।
 आगे आप दोनों की रोमांटिक जोड़ी बनती है?
नहीं, हम दोनों के बीच ऐसा कुछ नहीं होता। मैं उसे एक भाई की तरह मार्गदर्शन देता हूँ। उसके साथ होता हूँ।
 ये आपकी कंगना/बहन कौन है?
रितु शास्त्री।
 इस फिल्म से क्या उम्मीद करते हैं आप?
व्यावसायिक स्तर पर कोई कुछ भी दावा नहीं कर सकता। लेकिन, कथानक, अभिनय, गीत-संगीत और जबरदस्त एक्शन देखकर आप जरूर दूसरे को एक बार ‘कंगना का इंतकाम’ देखने को कहंेगे।
 माॅडल और मंच कलाकार के रूप में आपको पहले से लोग जानते हैं, रजत पट पर क्या यह पहला अवसर है?
नहीं, मेरी पहली फिल्म थी ‘नदिया के पार’ फेम डायरेक्टर गोविंद मूनीस के निर्देशन में बनी। ‘‘गंगा जईसन पावन पिरितिया हमार’’ इसमें रविकिशन के साथ था। दूसरी गौरव घई के साथ ‘‘छैला बाबू’’ जिसके निर्देशक राजकुमार पांडेय थे। बालकृष्ण सिंह के निर्देशन में एक फिल्म की थी- ‘‘दामाद चाहीं फोकट में’’। उसमें विनय आनंद थे। रितु शास्त्री भी उसमें थी, पर मेरे साथ श्वेता मिश्रा है। ‘‘कंगना का इंतकाम में’’ वही निर्देशक बालकृष्ण सिंह ही हैं और उन्होंने मेरी जोड़ी माधुरी मिश्रा (नयी) के साथ बनायी है। शीर्षक भूमिका तो रितु (शास्त्री) निभायी है।
 हिंदी में भी कोई फिल्म है?
राजीव रूईया के निर्देशन में ‘फ्लेम’ यह कई फिल्मोत्सवों में दिखाई जा चुकी है।