पवन सिंह की “लागी नाहीं छूटे रामा” बिहार में हंगामा

अस्सी के दशक में राजश्री प्रोडक्शंस की महान फिल्म “नदिया के पार” ने जैसा धूम मचाया था, उसके बाद पहली बार भोजपुरी फिल्म “लागी नाहीं छूटे रामा” पूरे बिहार के दर्शकों में वही पागलपन पैदा करने में सफल हो गई है. इस साफ-सुथरी पारिवारिक फिल्म का आलम यह है कि सुबह टिकट काउंटर खुलता है, पर दर्शकों की कतार आधी रात से ही लग जाती है. हर सिनेमघर में क्षमता से ज़्यादा दर्शकों की भीड़ की वजह से प्लास्टिक की अतिरिक्त कुर्सियां लगाई जा रही हैं. “लागी नाही छुटे रामा” विगत शुक्रवार को बिहार के 100 से ज्यादा सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई और इसे देखने दर्शक बढ़चढ़ कर भाग ले रहे हैं। शादी और तलाक की के बीच पनपे एक अछूते प्यार की कहानी है “लागी नाहीं छूटे रामा”. फिल्म में पवन सिंह की शादी गलती से काव्या से हो जाती है. काव्या के पिता कुणाल सिंह, जो कि मुम्बई शहर के डॉन हैं, पवन से कहते हैं, जबतक तुम दोनों का तलाक नहीं हो जाता, तबतक तुम्हें हमारे घर पर ही रहना होगा. तलाक देने के लिए अपने ससुराल में रह रहे पवन को धीरे-धीरे काव्या से प्यार हो जाता है, और….

निर्देशक जगदीश शर्मा ने कमाल की फिल्म बनाई है. फिल्म बिल्कुल ही साफ-सुथरी और दिल को छूनेवाली है. इसमें पवन सिंह, काव्या और कुणाल सिंह ने अबतक का सबसे बेहतरीन अभिनय किया है. पवन का तकियाकलाम “भाक्क मरदे’ दर्शकों की जुबान पर चढ चुका है. सबसे मज़ेदार बात यह है कि ज़्यादातर दर्शक सिनेमाघर से बाहर निकलते समय फिल्म के बहुत सारे संवाद बोलते हुए निकल रहे हैं।
“लागी नाही छुटे रामा’ के प्रस्तुतकर्ता हैं आशु निहलानी और राज लालचंदानी. इस फिल्म का निर्माण क्राउन फिल्म्स और जगदीश शर्मा प्रोडक्शन के बैनर तले किया गया है. फिल्म की पटकथा लिखी है निर्देशक जगदीश शर्मा ने, जबकि कहानी और संवाद लिखा है के. मनोज सिंह ने. संगीत घुंघरु का है और गीतकार हैं प्यारेलाल कवि, अरविन्द तिवारी और आजाद सिंह। मारधाड़ निर्देशक हैं हीरा यादव। फिल्म बिजनेस के जानकारों का दावा है कि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड कायम करनेवाली है।