अपनी फिल्मों से मुनाफा नहीं चाहिये कृष्ण कुमार

इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर लंबे समय तक ऑटोमोबाइल कंपनी में मैनेजर रहे कृष्ण कुमार ने अचानक एक दिन नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया। घर-परिवार, दोस्तों को तब हैरानी हुई जब सुना कि अब ये एक्टिंग की दुनिया में जा रहे हैं। दो-ढाई साल के सफर में ही कृष्ण कुमार न केवल एक्टर बने बल्कि प्रोड्यूसर और डिस्ट्रीब्यूटर भी बन गये। सीवान जिले के झंझवा गांव के रहने वाले कृष्ण की पढ़ाई-लिखाई कोलकाता में हुई है। उनसे बात-
अच्छी-भली नौकरी को छोड़कर फिल्मों में आने का फैसला कितना सही था? जो सोचकर आये, क्या उस उद्देश्य को पाने में कामयाब हो रहे हैं ?जब मैंने नौकरी छोड़ी थी, तब यह सवाल हर किसी ने किया था। सबको लगा कि यह पागलपन भरा फैसला था। घर-परिवार के लोग भी खुश नहीं थे। पिताजी कोलकाता में टीचर थे, इसलिये मैं भी वहीं चला गया था। इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और वहीं ऑटोमोबाइल कंपनी में नौकरी कर ली। मेरे काम से खुश होकर कंपनी ने मुझे गोरखपुर भेज दिया मैनेजर बनाकर, लेकिन हमेशा लगता था कि नौकरी करके क्या हासिल होने वाला है। इसी बीच गोरखपुर के आस-पास भोजपुरी फिल्मों की हो रही शूटिंग को देखने का मौका मिला। मेरी उत्सुकता को देखते हुए कुछ फिल्मों में काम करने के ऑफर भी आ गये। ‘‘सैयां सिपहिया’ और ‘‘कहां जईबो राजा नजरिया लड़ाई के’ ने मेरी दिशा को ही बदल दिया। छोटे-छोटे रोल ही मिले थे लेकिन एक्टिंग आदत बन गयी। उसके बिना रहना मुश्किल हो गया। तब मुझे लगा कि बोरिया-बिस्तर बांधकर सीधे मुंबई चला जाये। आज मैं यह कहने की स्थिति में हूं कि कामयाबी को पाने के लिये उस रास्ते पर चल चुका हूं। एक्टिंग से निर्माता और फिर वितरक बनने की इच्छा किसी योजना के तहत हुई या किसी मजबूरी के कारण? मैं अपने आप से कभी झूठ नहीं बोलता और जो सच है उसे छिपाने की कोशिश भी नहीं करता। बतौर एक्टर या कहें सेकेंड लीड में कई फिल्मों में आया लेकिन कोई भी मुझे हीरो के रूप में चांस नहीं दे रहा था। किसी ने मुझे समझाया कि अगर हीरो बनना है तो इंतजार मत करो, अपने पैसे लगाकर फिल्म बनाओ और हीरो बन जाओ। मैंने वही किया। वैसे, मैंने देखा कि अगर आप सिंगर हैं तो भोजपुरी में हीरो बनने का चांस अपने आप बन जाता है। इस बीच मैंने अनूप जलोटा के साथ मिलकर एक फिल्म ‘‘बेताब’ बनाई। काफी सफल रही, उस फिल्म से मेरी पहचान बन गयी। उसके बाद ‘‘जो जीता वही सकिंदर’ और ‘‘हीरो नंबर वन’ में सेकेंड लीड किया। इन तीनों फिल्मों में खेसारी लाल लीड रोल में थे। इसके बाद ‘‘गंवार दुल्हा’ आ रही है, इसमें मैं हीरो बना हूं। फिर ‘‘बरसात’ आयेगी, जिसमें खलनायक का किरदार निभा रहा हूं। इस समय ‘‘एक और परशुराम’ की शूटिंग चल रही है। यहां फिल्म बेचना बड़ा मुश्किल काम माना जाता है इसलिये मैं खुद वितरक भी बन गया।आपकी फिल्मों में मुनाफे का प्रतिशत क्या है? भोजपुरी में कमाई के लिये मेकर्स अच्छे-बुरे का फर्क भी भूल गये हैं। अगर मुझे पैसे की इतनी ही चिंता होती तो मैनेजरी नहीं छोड़ता। मनोरंजन के नाम पर जो आज फूहड़ सब्जेक्ट परोसे जा रहे हैं। उससे सिनेमा ही नहीं, पूरे भोजपुरी समाज और संस्कृति की छवि बिगड़ी है। अपनी फिल्मों से मुझे मुनाफा नहीं चाहिये, इसलिये अच्छी कहानी के लिये कहानीकारों को आमंतण्रदे रहा हूं। फिल्म में सुपर स्टार हो, लेकिन उससे ज्यादा जरूरी है कि आपके पास कहने के लिये कुछ हो। कुछ लोग एडल्ट फिल्मों की वकालत कर रहे हैं, लेकिन मैंने जहां तक देखा है ऐसी फिल्में बनाने वाले आते तो हैं लेकिन कहां चले जाते हैं, कुछ पता ही नहीं चलता। ऐसी फिल्मों को कोई पूछने वाला भी नहीं होता। यही वह रिजल्ट है जो इंडस्ट्री में सुधार ला रहा है।