कबाली से ग़दर की तुलना करना बेवकूफ़ी

भोजपुरी सिनेमा के लिए इससे बड़ी बिडम्बना और क्या हो सकती है कि भोजपुरी के अपनी ही भोजपुरी की बदनामी करने पर तुले हों। जी हां, आज अगर भोजपूरी अगर सबसे अधिक बदनाम हो रही है तो उसके पीछे सबसे बड़ा हाथ भोजपुरी सिनेजगत के पीआरओ का है। उलुल जुलूल खबरे बना कर अपने निर्माता और संबंधित कलाकार को खुश करने के लिए ये लोग सम्बंधित कलाकार और उक्त फिल्म की गरिमा को भूल जाते हैं। अभी हाल ही में प्रदर्शित हुई सुपर स्टार अभिनेता पवन सिंह अभिनीत फिल्म की तुलना पहले सीतामढ़ी से एक पीआरओ ने सलमान खान अभिनीत सुल्तान से कर दी। उन्होंने जी हजूरी के चक्कर वो जग हँसायी करवाया जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती। इतना ही नहीं एक फिल्म प्रचारक ने तो गदर की तुलना रजनीकांत अभिनीत फिल्म कबाली से कर दी। उन्होंने लिख दिया कि कबाली को भी पछाड़ा गदर ने। शायद प्रचारक साहब इस बात को भूल गए की कबाली ने अपने प्रदर्शन से पहले ही 200 करोड़ की कमाई कर ली थी। तो फिर कबाली को कैसे गदर ने पछाड़ दिया ये बात समझ से परे है, इसे तो प्रचारक साहब ही बता सकते हैं। फिलहाल एक बात तो साफ है कि अगर भोजपुरी के पीआरओ अगर ऐसी ही फेक खबरें चलाते रहेंगे तो ऐसे ही उक्त फिल्म और सम्बंधित कलाकारों की जग हँसायी होती रहेगी, जिस वजह से उक्त स्टार की छवि धीरे धीरे धूमिल होने की संभावनाएं प्रबल हो जाती हैं।

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