सेटिंग हो जाती तो मुझे भी अवार्ड मिलता : BIFA

भोजपुरी अंतर्राष्ट्रीय फिल्म अवार्ड के आयोजकों ने एक सराहनीय कदम उठाया है. 06 जून 2015 को माॅरिसस में हुए भोजपुरी अंतर्राष्ट्रीय फिल्म अवार्ड ने भोजपुरी का ओहदा बढ़ा दिया है. चलिये किसी ने तो प्रयास किया भोजपुरी को भारत से बाहर ले  जाकर सम्मान दिलाने का. जो कि संपूर्ण भोजपुरी भाषी के लिए एक गर्व की बात है. लेकिन यह अवार्ड किस मापदंड पर दिया गया इसका कोई माई-बाप नहीं है. प्राप्त सूत्रों के अनुसार भोजपुरी फिल्म ‘निरहुआ हिन्दुस्तानी’ ने कुल 7 अवार्ड पाये जबकि भोजपुरी फिल्म ‘योद्धा’ ने तीन अवार्ड झटके. वहीं बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड रानी चटर्जी को दिया गया जिसका पूर्वानुमान पहले हीं लगा लिया गया था. भोजपुरी सिनेमा जगत के लिए पाखी हेगड़े ने बहुत योगदान दिया हॅै. जबकि उन्हें इस अवार्ड फंक्शन से दूर रखा गया. आखिर ऐसा क्यों हुआ ये तो हमारे अवार्ड आयोजक हीं बता सकते हैं? इतने बड़े अवार्ड फंक्शन में भोजपुरी के लोकगायक भरत शर्मा को क्यूं नहीं पूछा गया. क्या वे भोजपुरी के लिए कुछ नहीं किये हैं? आप सब कहेंगे कि मैं खिचाई कर रहा हूॅं, प्रोत्साहित नहीं. लेकिन क्या करूं यहां पर प्रोत्साहित करने योग्य काम तो हुआ लेकिन उससे अधिक भोजपुरी की हंसाई का. अब आप यह सोच रहे हैं कि इसमें भोजपुरी की हंसाई की बात कहां से आई. तो चलिये मैं बता देता हूॅं. हुआ कुछ ये है कि ये संपूर्ण अवार्ड फंक्शन बिना किसी मापदंड के सफल हुआ है. जिसमें न तो किसी अवार्ड में नोमिनेशन की बात सामने आई है, और न हीं उचित अवार्ड किसी को मिला है. अगर हमारे आयोजक अवार्ड फंक्शन के दौरान नोमिनेशन को दिखा कर अवार्ड दिये हैं तो अवार्ड के 14 घंटे बाद भी नोमिनेशन के नाम की घोषणा क्यों नहीं किये. इस अवार्ड फंक्शन में ‘निरहुआ हिन्दुस्तानी’ ने कुल 7 अवार्ड प्राप्त किये जिसमे बेस्ट एक्टर दिनेश लाल यादव, बेस्ट न्यू कमर एक्ट्रेस आम्रपाली, बेस्ट स्टोरी सतीश जैन, बेस्ट डायलाॅग राईटर संतोष मिश्रा, बेस्ट लिरिक्स प्यारे लाल कवि, बेस्ट फिमेल सिंगर कल्पना. यह आप सभी भी भलीभांति जानते हैं कि किसी भी फिल्म को सही दिशा में निर्देशित करने का काम निर्देशक का होता है. तो जब सब अवार्ड ‘निरहुआ हिन्दुस्तानी’ ले गई तो क्या वहां पर डाॅयरेक्टर साहब झक मार रहे थे. जबकि निरहुआ हिन्दुस्तानी को सफल बनाने में सबसे अधिक योगदान उनका था. तो आखिर बेस्ट डायरेक्टर का अवार्ड भी उन्हें क्यूं. नहीं मिला? जो कि फिल्म योद्धा के निर्देशक साहब को मिला. यहां तक कि योद्धा को सर्वश्रेष्ठ फिल्म भी घोषित कर दिया गया. क्या योद्धा से कहीं बेहतर निरहुआ हिन्दुस्तानी, पटना से पाकिस्तान या कोई अन्य फिल्म नहीं थी. किसी और फिल्म की बात छोड़ दीजिए जब 7 अवार्ड निरहुआ हिन्दुस्तानी को मिला तो क्यों नहीं कहा जाय कि निरहुआ हिन्दुस्तानी हीं सर्वश्रेष्ठ फिल्म है. जो बेस्ट डायलाॅग राइटर का अवार्ड जो ‘निरहुआ हिन्दुस्तानी’ के संवाद लेखक साहब को मिला वो कहीं ऐसा तो नहीं कि फिल्म में अधिक द्विअर्थी संवाद उधेड़ने के चलते मिला. क्योेंकि निरहुआ हिन्दुस्तानी फिल्म में द्विअर्थी संवादों की भरमार है. सबसे अधिक आश्चर्य की बात तो यह है कि इस अवार्ड फंक्शन के पीआरओ साहब अवार्ड खत्म होने के 14 घंटे बाद भी कुम्भकर्णी निद्रा में मग्न है. न तो कहीं अवार्ड की कोई पब्लिसिटी है और न हीं इसकी चर्चा. क्या कुम्भकर्णी निद्रा में मग्न होने के लिए हीं पीआरओ साहब ने इस अवार्ड फंक्शन की पब्लिसिटी का जिम्मा उठाया था. इस अवार्ड फंक्शन को देख कर बस यही कहा जा सकता है कि सब मिली भगत है. काश! मेरी भी सेटिंग होती तो मुझे भी बेस्ट एक्टर का अवार्ड प्राप्त हो जाता. भले हीं मैने किसी फिल्म में काम नहीं किया है. इससे क्या फर्क पड़ने वाला है. क्योंकि यहां पर जो अवार्ड वितरित हुआ वो भी तो बिना लेखा-जोखा के हुआ. जो अवार्ड वितरित हुआ वह कुछ ऐसे है – बेस्ट अभिनेता- दिनेश लाल निरहुआ,  बेस्ट अभिनेत्री – मधु शर्मा, बेस्ट पॉपुलर अभिनेत्री – रानी चटर्जी,  बेस्ट पॉपुलर अभिनेता – रवि किशन , सर्वश्रेष्ठ फिल्म – योद्धा,  सर्वश्रेष्ठ निर्देशक – राज सिप्पी  (फिल्म-योद्धा),  बेस्ट निगेटिव रोल  – रवि किशन,  बेस्ट कॉमेडी – परितोष त्रिपाठी,  बेस्ट सिंगर (मेल) – पवन सिंह, बेस्ट सिंगर (फीमेल) – कल्पना पटवारी,  बेस्ट संगीतकार – बप्पी जी एवं गोविन्द ओझा,  लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड – कुणाल सिंह, बेस्ट कहानी लेखक – सतीश जैन,  बेस्ट डायलॉग राइटर – संतोष मिश्रा,  बेस्ट लिरिक्स राइटर – प्यारेलाल कवि,  बेस्ट नई कमर एक्ट्रेस – आम्रपाली. बिफा बेस्ट पर्सनाल्टी अवार्ड – उदेश्वर सिंह, सुजीत कुँअर तिवारी, रणजीत सिंह, विनोद गुप्ता, अजय श्रीवास्तव, शंकर भोरा. कमला लता को मिला. ‘विथ सेटिंग, अवार्ड गेटिंग’. तो क्या मैं गलत कहा कि ये अवार्ड मुझे भी मिल सकता है. मैं एक बार भोजपुरी के लिए काम कर रहे सभी से कहूंगा कि आप भोजपुरी को उंचा उठाने का काम करे और बेहतरीन ढंग से करें ना कि ऐसा काम करें जिससे भोजपुरी लांछित हो.