भोजपुरिया संगीतकारों में अनुभव की कमी

अधिकतर झोला छाप डाक्टर की तरह हैं संगीतकार
अनुभव की कमी के कारण कर रहे हैं संगीत का छिया-लेदर
बैंड बाजा बजाने के लिए लेते हैं 5 से 6 लाख रूपया

भोजपुरी सिनेमा जगत आज दिन दूनी रात चैगूनी तरक्की कर रहा है। यह पूरी भोजपुरी सिनेमा जगत के लिए गर्व की बात है। हम सभी यह बखूबी जानते हैं कि किसी भी म्यूजिक एलबम या फिल्म को हिट कराने में उसके संगीत का सबसे अहम भूमिका होती है। फिल्म के कलाकार भले हीं जी-जान लगाकर फिल्म में काम करें औंर उसका संगीत कमजोर पड़ जाये तो उस फिल्म को पीटने (फ्लाॅप) होने से कोई भी नहीं बचा सकता है। आज के समय में भोजपुरी की अधिकांश फिल्में लगातार फ्लाॅप हो रही हैं। विषय-वस्तु के साथ साथ उसका एक कारण फिल्म का कमजोर संगीत भी है। जहां तक भोजपुरी सिनेमा जगत के संगीतकारों की बात की जाय तो एका-दूका को छोड़ कर कोई भी संगीतकार संगीत के ज्ञान से परिपूर्ण नहीं है। हमारे सिनेमा जगत में झोला छाप डाक्टर की तरह हीं संगीतकारों की भी भरमार है। ये वैसे संगीतकार है जिन्हें संगीत के सात सुरों का पूर्ण रूप से ज्ञान नहीं है। सिर्फ सा-रे-गा जान क्या लिये और कहीं से संगीत का इलेक्ट्राॅनिक (डिजीटल) साॅफ्टवेयर सीख क्या लिये ये महाशय लोग खुद को संगीतकार कहना शुरू कर देते हैं और अनुभव की कमी के कारण संगीत का छिया-लेदर करना शुरू कर देते हैं। फिल्म या एलबम में इनलोगों द्वारा दिया गया संगीत किसी शादी-विवाह में बजाने वाले बैंड-बाजा पार्टी से कम नहीं होता। नया संगीत बनाने आता तो इनको है नहीं किसी म्यूजिकल एलबम का ट्रैक या पुराने संगीत ट्रैक को हीं उठा कर उसमें थोड़ा बहुत छेड़ छाड़ कर के ये लोग अपने आप को तीसमार खान समझने लगे हैं। एक फिल्म में संगीत देने के एवज में ये महाशय लोग निर्माता से 5 से 6 लाख रूपया लेते हैं। किसी किसी फिल्म में इन लोगों का संगीत देख कर लगता है सीन कुछ चल रहा है और संगीत -सीन का कोई तालमेल हीं नहीं है। कभी – कभी तो ऐसा लगता है कि ये लोग फिल्म में खुशी के सीन में भी गमगीन संगीत देकर अपना काम बखूबी निभाये हैं। साफ तौर पर यह कहा जा सकता है कि भोजपुरी सिनेमा जगत में संगीतकारों की भारी मात्रा में कमी है। ऐसा नहीं हमारे सिनेमा जगत में संगीतकार नहीं है। संगीतकार तो बहुत है बरसाती मेंढ़क की तरह लेकिन उनके पास अनुभव हैं हीं नही। ऐसे संगीतकारों को देखकर तो यही कहा जाता सकता है कि -‘अइली ना गइली-फलाना बऽ कहइली’।