आज के भोजपुरिया सुपरस्टार हीं, भोजपुरी में व्याप्त अश्लीलता के जनकधार

सुनने में कुछ अजीब लग रहा है. लेकिन यह उतना हीं सत्य है जितना की इस संसार में आत्मा और परमात्मा. आज भोजपुरिया सिनेमाजगत अश्लीलता के अथाह दलदल में दिन प्रतिदिन धसते जा रहा है. रोजाना भोजपुरी भाषा के साथ भोजपुरी सिनेमा जगत से जुड़े कलाकार दुव्र्यवहार कर इसे लांछित कर रहे हैं, फिर भी सब चुप्पी साधे हुए हैं. आखिर ऐसा क्यों? क्या कोई ऐसा भोजपुरिया कलाकार नहीं जो कि भोजपुरी भाषा के साथ न्याय कर इसके दामन पर लगे अश्लीलता नामक कलंक को धो सके? जहां तक मेरा मानना है शायद कोई ऐसा भोजपुरिया कलाकार नहीं ? अब समय आ गया है भोजपुरी भाषा के साथ खिलवाड़ कर इसे दागदार बनाने वालों के खिलाफ अवाज उठाने कि क्यों कि अब पानी नाक से उपर हो चला है. ऐसे में अगर अब भोजपुरिया श्रोता-प्रेमी आवाज नहीं उठाये तो वो दिन दुर नहीं कि भोजपुरी का नाम मिट जायेगा. सब भोजपुरी को हेय दृष्टि से देखने लगेेंगे. हालांकि लोगों कि मानसिकता भोजपुरी के प्रति अभी हीं बदल चुकी है कि भोजपुरी तो सिर्फ अश्लीलता का सागर है. इसके गायक-नायक-नायिका-लेखक-निर्माता-निर्देशक मिलकर माॅ-बहन-भौजाई सब रिश्तों में अश्लीलता का गंध मिला कर अपने व्यवसाय के लिए श्रोता और दर्शकवर्ग के बीच पेश कर रहे हैं.
आज जो भोजपुरी भाषा का हाल हुआ है, जिस रफ्तार से भोजपुरी अश्लीलता के दलदल में समाते जा रहा है उसका श्रेय सिर्फ और सिर्फ जाता है आज के भोजपुरिया सुपरस्टारों को, जो कि इस भोजपुरी में व्याप्त अश्लीलता के जनकधार हैं. जिन्होंने अपने सितारे बुलंद करने के लिए भोजपुरी भाषा को कलंकित कर दिया. जिसमें सबसे पहले नाम आता है भोजपुरी सिनेमा जगत के सुपरस्टार कहलाने वाले अभिनेता मनोज तिवारी ‘मृदुल’ का. इन्होंने भोजपुरी भाषी श्रोता वर्ग को कई लोकगीत का एलबम मनोरंजन के लिए दिया. जिस दौरान इन्होंने अपने मधुर आवाज में ‘बबुनी के लागल बा शहर के हवा’, ‘ तेरी गरमी दूर कर दूंगा’, ‘अइसन दिहलू पप्पी’, ‘मन होखे त बोलऽ नेवता पेठाई’, ‘बड़ी मुश्किल से भईलु तईयार’, ‘चल पोखरा में डूब के’, ‘हाॅफ पैन्टवाली’, ‘गोदिया में हमके लेल पिया’ जैसे गीत शामिल थे. भोजपुरी सिनेमा का जब तीसरा दौर शुरूआत वाली भोजपुरी फिल्म ‘ससुरा बड़ा पईसावाला’ में भी अश्लील गानों की कमी नहीं थी. जिसमें ‘छउड़ी हिय हाई भोल्टेज वाली’, ‘चुए लागल चुए लागल’ जैसे गाने शामिल थे. लेकिन इस समय तक द्विअर्थी भोजपुरी गाने हीं हुआ करते थे. एक तरीका से देखा जाय तो मनोज तिवारी मृदुल भी भोजपुरी में व्याप्त अश्लीलता के जनकधार हैं. तो जब ये अश्लीलता के जनकधार हैं तो कैसे उठायेंगे वैसी बात पर आवाज जिसकी बदौलत ये आज यहां तक पहुंचे हैं.
अभी तो ये शुरूआत है हम आपको आगे ऐसे कई भोजपुरिया सुपरस्टारों को नाम बतायेंगे जो कि भोजपुरी को इस दलदल में धसाने में अपनी अहम भूमिका निभा चुके हैं.